Thursday, 7 May 2015

The Popla Moon







आज चाँद पोपला है,

सब सो गये, बतलाता है,

दाँत झर गये पर गाता है,

वो हर महीने पोपलाता है,

पैदा होता है और मर जाता है;

आज वो पोपला है,

बिल्कुल उबले अंडे सा,


या कि पपीते सा, न मालूम,


वो हर महीने पैदा होता है,



खेलता ख़ाता, बढ़ता, पीता और जीता है...


चाँदनी से रोमॅन्स करता है,


और रीता है...


आज चाँद पोपला है....


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