Tuesday, 9 September 2014

The poet.

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मैं कवि हूँ ,
शब्दों का रवि हूँ ,
मैं सस्ते शब्दों में मँहगा अनुवाद करता हूँ ;
झूठे भावों से महफिलें आबाद करता हूँ ,
मैं कवि हूँ ;
जाने कितनी प्रियतमाओं को मैने झूठी विरहा झिलाई ,
ना जाने कितनी बार मर्यादाओं में आग लगाई ;
मैं तालियों के हिसाब से लय लाता हूँ,
मुक्तक को छंद ,
छंद को मुक्तक बनाता हूँ ;
मैं कवि हूँ ,


क्या मैं कवि हूँ ??