Sunday, 7 September 2014

Flowers

 पुष्‍प
क्यों पुष्‍प महकते अब नहीं ,
देख कर भौरें तुम्हें,
क्यों पुष्‍प चहकते अब नहीं ,
बाग़ वीराँ हो चुके ,
पेड़ सूख सो चुके ,
बेआब धरती हो रही,
सूख सूख रो रही ,
क्यों मेघ बरसते अब नहीं,
देखकर यौवन तुम्हें ,
क्यों मेघ तरसते अब नहीं ,
जंगल ठूँठ जल चुके ,
राख में बदल चुके ,
बागबां बर्बाद हैं ,
इंसान बस आबाद हैं,
पूछता हूँ इंसान से ,"क्या तुम समझते नहीं ?"
देखकर इंसान को  "क्यों पुष्‍प महकते अब नहीं ?"