Saturday, 13 September 2014

The Song of Crickets




सुनता हूँ रातों को,
कुछ झींगुरों की विरहा, 

हर रात कुछ नया साज़ लाते हैं;
किसी को बुलाते हैं,

मौन सा आता है सुनकर उन्हें,
कौन आता है सुनकर उन्हें?

मैने कभी किसी को नहीं देखा;
पर वे हर रात मदमस्त गाते हैं;
शायद गाना उन्हें पसंद हैं!