Thursday, 4 September 2014

दिल दुखता है, दिल लगाने से



Heart

बहुत सीखा है जमाने से; पर ठगना नहीं सीखा ,
चश्मा लगाकर बात करने की आदत मेरी नहीं ;

दिल दुखता  है ,
अब दिल लगाने से ;

राह के पत्थर को ठोकर पड़ी कितनी ,
क्या होगा अब तराश लाने से;

गंगा को गंगा होने का सुबूत नहीं चाहिये ,
गटर गंगा नहीं  बन जाती, बोतलों में भर लाने से ;

सुकूँ क्या है? सुकूँ  में सुकूँ  से पूछिये,
 दिमाग मर जाता है, सुकूँ के आने से ;

हो तन्हा , तो तन्हाई के आलम को देखिये ,
बस जम्हाई ही आती है बिना बुलाने से ,

इक राह पे साथ हम सब चले ,
वो  राह मिट गई , नई राहों के आने से ;

हो अकेले जब , आवाज़ लगाइये ;
कौन आता है बस तुम्हारे बुलाने से ,

हों  अरमाँ बहुत तो दिल में संजोइये ,
मिट जाते हैं लोग जमानें में दिखानें से |

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