Thursday, 4 September 2014

तलाश



squirrel
Squirrel


रात के अंधेरों में जुगनू क्या तलाश करता है?
जंगल का राही जंगल तलाश करता है,
मुंडेर पे कौआ क्या फरियाद करता है?
आसमानी परिंदा घरों में बसने की बात करता है!
वक़्त की गुल्लक में  क्या जलसा तलाश करता है?,
चांद भी हरदम ;
एक सा रहने की आस करता है||
देखा है मुर्दों को,
मैने मुर्दा दफ़नाते हुये;
मुर्दा भी इक पल उठने की आस करता है;
खुद झाँकता है खुदा;
फकीर की आँखों से,
इनसां पत्थरों में फिर क्या तलाश करता है ?,
प्यार तो महक है,
फ़िज़ा में महकती है;
जिस्म का रोगी, जिस्म में तलाश करता है||
रूह तो आज़ाद है,
ये तस्ब्बुर है उसका;
क्यों जिंदगी की दौलत,
रिवाज़ों में खराब करता है||