Monday, 1 September 2014

अक्स

sweet memories


जब मिलता हूँ तुम्हें,
एक चर्च याद आता है,
महुए के पेड़ का चबूतरा,
टिफिन का परांठा आचार याद आता है,
वो पीरियड का चक्कर,
और फर्स्ट आने की टक्कर;
मॉनीटर के नाम पर हेकड़ी का गरूर ,
कागज पे लिखकर बात करने का सुरूर ,
अनजानों की भीड़ में कोई अपना सा याद आता है,
ओछी ड्रेस के अपने ही मज़े थे,
किताबों के पुट्ठों के कलेवर,
हिन्दी की मात्राओं पर टीचर के तेवर,
छूटे हुये पन्नों पर;
प्रश्नचिन्ह याद आता है,
वो दिन बड़े अजीब थे,
दुनिया से अनजान ,
फिर भी करीब थे,
अब जानकर सब,सब अनजान हैं,
दिखता है जब कोई खिलखिलाता;
गुजरे हुये अतीत का ,
अक्स नक्जर आता है |

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