Sunday, 31 August 2014

नसीब

Naseeb
Naseeb



लिखता हूँ नगमें,
कुछ तेरे भी हैं,
कुछ मेरे भी हैं,
चाहत दिलों की है,
दिल तेरे भी हैं,
दिल मेरे भी हैं,
सोचता हूँ चेहरे,
कुछ तेरे भी हैं,
कुछ मेरे भी हैं,
दूरियाँ दिलों की हैं,
घर तेरे भी हैं,
घर मेरे भी हैं,
खोजता हूँ मंजिलें,
राहें तेरी भी हैं,
राहें मेरी भी हैं,
कारवाँ बहुत से हैं,
ठिकाने तेरे भी हैं,
ठिकाने मेरे भी हैं,
हलक में हैं प्यासें,
लब तेरे भी हैं,
लब मेरे भी हैं,
पाता हूँ तुझको,
और खो देता हूँ,
नसीब तेरे भी हैं,
नसीब मेरे भी हैं|