Saturday, 11 February 2012

फिर बैठा हूँ लिखने

Note: This is a post by Rahul Shukla



मैं चराग हूँ जलता,

'तमिश' में ही खिलूँगा,

फिर बैठा हूँ लिखने,

एक नया इतिहासः लिखूंगा,

मेरी कलम मेरी 'कृपाण',

मेरे  शब्द  मेरी 'ढाल',

मेरी इबारत ही मेरा अस्तित्व,
खोजने बैठेगा 'खोजी' मुझे,

मैं इबारत की मूरत में मिलूंगा 

रंग मेरा 'स्याहा' होगा 

शब्दों  की 'सूरत' में मिलूंगा |