Saturday, 11 February 2012

रहस्यवाद

एक लम्बे समय से मैं 'रहस्यवाद ' पर चिंतन करता रहा हूँ | रहस्यवाद हर जगह है, बस आपको एक पकडू नजर चाहिए और फिर आप आप भी रहस्यवाद को पकड़ पायेंगे |
हो सकता है की 'प्रकृति' और 'पुरुष' के बीच में जो शून्य है , वही समस्त रहस्यवादों का उदगम हो |
खैर जो भी हो हमें परा रहस्यवादों पर चर्चा नहीं करनी चाहिए क्योंकि जो हम से परे है, वो हमारा नहीं |


जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूँ की इसका बिखराव सर्वत्र है, तो आइए इसके उन प्रकारों पर चर्चा करते हैं, जो कि सर्वसाधारण द्वारा देखे जा सकते हैं |
फिल्म निर्माताओं के लिए सफल फिल्म एक रहस्यवाद होती है, दर्शकों की पसंद भी एक रहस्यवाद होती है |
शायद रहस्यवाद ,रहस्यवाद को ढूँढता है, और एक नया रहस्यवाद बन जाता है |
नेताओं के लिए कुर्सी एक रहस्यवाद बनी रहती है, और वो इसकी प्राप्ति के लिए कठोर तप भी करते हैं [ केवल चुनाव के समय पर ही ]
वैज्ञानिकों के लिए 'जीवन की उत्पत्ति' एक रहस्यवाद है |

शक भी एक किस्म का रहस्यवाद ही है, और शक करने वाला इंसान सारी उम्र अपने रहस्यवाद को सुलझाने में लगा रहता है |
शक करने वाले का रहस्यवाद तब और भी ज्यादा गहराई में उतर जाता है, जब कोई उत्प्रेरक [कैटालिस्ट] उपस्थित हो (देसी या अंग्रेजी) |
उत्प्रेरक की उपस्थिति इंसानी चेतना के कुछ नए आयाम खोल देती है, जिनमें से कुछेक आयाम दिल दहलाने वाले भी हो सकते हैं |
चेतना का यह नवीन विस्तार उत्प्रेरक की क्रियाशीलता तक सारे रहस्यवादों को सुलझा देती है और एक नए रहस्यवाद को जन्म देकर फिर सो जाती है |


इस प्रकार के साधकों की यह साधना नित रात्रि चला करती है |
जो दिन में इंसान होते हैं, रात की साधना में 'अघोरी' बन बैठते हैं |