Thursday, 1 December 2011

सट्की तुम्हारी तो 'दगा' दे दिया


'टपरा तलाशा '
 तलाश  पूरी  हुई 
देखा  तमाशा 
 तमाश  पूरी  हुई ...



 अटकी  तुम्हारी  तो वफ़ा का वास्ता ;
सट्की तुम्हारी  तो  'दगा'   दे  दिया 

 हुआ  यूँ  कि  कभी  'ये' दिया 
 और  कभी  'वो' दे  दिया 


'हग' अंग्रेजी  में  था  तो  मुकम्मल  था 
 हिंदी  में  हुआ  तो  'बेजा ' दे  दिया 
'गुजारा ' तो  बोले  जिंदगी  थी 
न  गुजरी  तो  'उम्र ' का  'फलसफा ' दे  दिया 


'कागजों' पे  उकेरा  तो  'लफ्ज' कहलाये 
 जो  न  उकेरा  उन्हें तो  'मरहबा' दे  दिया 

  एक  'दाद' दी  तो  महिफिलें  रंगरेज  हो  गयीं 
 दुत्कारा  तो  'अँधेरा ' दे दिया!