Wednesday, 31 August 2011

गहरी सांस लेने का अभ्यास कैसे करें



यदि  आपने गहरी सांस लेने का महत्व भली प्रकार से समझ लिया है तो गहरी सांस लेने का अभ्यास करना भी बहुत सरल होगा क्योंकि आप इसके लिए पर्याप्त प्रेरणा पाकर प्रयास करेंगे I केवल कुछ समय तक चैतन्य होकर सजगता पूर्वक अपनी आदत को सुधारते रहने से आपकी स्वांस खूब गहरी हो जाती है और आपका सीना भी मजबूत हो जाता है I बहुत शीघ्र ही आप इन लाभों से अपने जीवन में एक रूपांतरण पावेंगे I

१. यथा संभव झुक कर न तो बैठें और न ही चलें I सीधा  तन कर चलें और सीधा ही बैठें I

२. प्रातः बिस्तर छोड़ने के पहले करीब दस मिनट तक खूब गहरे स्वांस भरें और छोड़ें I स्वांस लेने और छोड़ने में समय बराबर लगावें I प्रारम्भ में यह कुछ कठिन प्रतीत होगा किन्तु शीघ्र ही आप यह बहुत आसानी से कर पायेंगे  I

३. यदि आप दिन भर में कहीं भी पैदल चल कर जाते हैं तो एक बहुत ही उत्तम अभ्यास आप कर सकते हैं जिससे आपकी गहरी सांस लेने की आदत भी पद जायेगी और एक अच्छा व्यायाम भी हो जाएगा :
आप यह गिनें की कितने कदम चलने में आप स्वांस को अन्दर भर सकते हैं: माना की यह ४ कदम है I
आप यह भी गिनें की कितने कदम चलने पर आप स्वांस को छोड़ सकते हैं : माना की यह ६ कदम है I

इस प्रकार से ४ कदम चलने पर स्वांस को पूरा गहरा भरना तथा ६ कदम चलने पर पूरा छोड़ देना--यह क्रम आप निरंतर बनाए रखिये I

४. आप यह देखिये की प्राकृतिक तथा सहज रूप से आप कितने सेकंड में स्वांस को भरते हैं तथा छोड़ते हैं I आप इस मात्र को एक नोटबुक में दर्ज कर लें और नित्यप्रति दिनांक दाल कर इस संख्या को रिकॉर्ड करते रहें: बहुत शीघ्र ही आप पावेंगे की यह संख्या बढती जा रही है और आपकी क्षमताएं भी बढती जा रहीं हैं I बिंदु तीन में बताये हुए अभ्यास को भी आप एक नोटबुक की सहायता से अभिवार्धित कर सकते हैं और परिणामों को कई गुना बढ़ा सकते हैं I

५. यथा संभव नाक से स्वांस लेवें I प्रकृति ने नाक स्वांस लेने के लिए बनायी है न की मुंह I जो विद्यार्थी मुंह से सांस लेते हैं वे बहुत ही जल्द रोगी हो  जाते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो  जाती है I नासिका मार्ग न केवल लम्बा होता है अपितु वहाँ कुछ बाल भी होते हैं जिनमे बाह्य वायु की मलिनताएँ फंस जातीं हैं और स्वच्छा वायु ही भीतर प्रविष्ट होती है--मुंह से स्वांस लेने पर यह लाभ नहीं होता I